जवना असुर के कवनो देवता ना हरा सकले, ओकरा के एगो बेटी हरवली। छठवाँ दिन माई कात्यायनी के ह, जे दुर्गा पूजा के मूल कथा के नायिका हई।
महिषासुर भैंसा के रूप वाला असुर रहे। ऊ बरदान पवले रहे कि कवनो देवता भा मरद ओकरा के ना मार सके। औरत के ऊ गिनती में ही ना लिहलस। बरदान के घमंड में ऊ देवता लोग के सरग से भगा दिहलस। तब ब्रह्मा, बिष्णु, महेश आ सब देवता के खीस से एगो तेज निकलल, आ ओह तेज से एगो देवी परगट भइली। ई घटना महर्षि कात्यायन के आश्रम में भइल आ सबसे पहिले ओही रिसि उनकर पूजा कइले, एह से ऊ कात्यायनी कहइली। हर देवता आपन हथियार दिहले: शिव तिरसूल, बिष्णु चक्र, इंद्र बज्र। हिमालय सवारी खातिर सिंह दिहले। कई दिन के लड़ाई के बाद माई महिषासुर के अंत कइली। एही जीत के उत्सव विजयादशमी ह।
एगो आउर कथा भागवत में बा। ब्रज के गोपी लोग किसुन के पति रूप में पावे खातिर अगहन महीना में जमुना किनारे कात्यायनी के बरत कइले रहली। तब से कुँवार लइकी लोग नीमन घर बर खातिर एह माई के पूजेली।
भोजपुरी इलाका में आज के दिन के आपन रंग बा। कई जगह छठ के साँझ बेल के गाछ तर पूजा होला आ माई के नेवता दिहल जाला, जेकरा के बेल नेवता कहल जाला। अगिला दिन सप्तमी के पंडाल में माई के पट खुलेला। मतलब आज के रात मूर्तिकार के आखिरी रात ह: माटी के मूरत पर आँख अबहीं बनल बाकी बा। एगो आउर बात धेयान देवे लायक बा। आज छठ तिथि ह, आ कुछ लोक मान्यता छठी मइया के एही कात्यायनी से जोड़ेला। सब पंडित एह बात पर एकमत नइखन, बाकिर गाँव के मन में दूनो माई एके अँचरा के छाँह हई।
कथा के सामाजिक सीख आज भी ओतने जरूरी बा। महिषासुर के हार ओही भूल से भइल जे आजो बहुत घर में होला: बेटी के कमजोर बूझल। जवना समाज में लइकी पढ़ेले, कमाले आ फैसला लेले, ओह समाज के असुर खुद कमजोर पड़ जाला। आ देवता लोग के तेज मिल के जइसे एगो शक्ति बनल, ओइसहीं मिल जुल के मनावल पर्व गाँव के एक डोर में बान्हेला। चंदा, पंडाल, भोग, सफाई, सब साझा काम ह।
आज के भोग मध ह। मध तुरंत ताकत देला आ पुरान समय से घरेलू नुस्खा में चलत आइल बा। एगो जरूरी सावधानी: एक साल से छोट बच्चा के मध ना चटावे के चाहीं, डाक्टर लोग एकरा से साफ मना करेला, काहे कि एकरा से छोट बच्चा में गंभीर बेमारी के खतरा रहेला। रंग हरियर मानल जाता, जे खेत के रंग ह। रंग के चलन नया बा आ भोग के रीत घर घर में अलग हो सकेला।
रउआ गाँव के पंडाल के मूर्ति के बनावेला? ओह कारीगर के कहानी [email protected] पर भेजीं।
