काल्ह के अन्हार के बाद आज अँजोर ह। महाअष्टमी के दिन माई के सबसे शांत आ उज्जर रूप, महागौरी, पूजल जाला। आज घर घर में छोट लइकी लोग के गोड़ धोआई आ माई के खोइंछा भराई।

कथा फेर ओही तप पर लौटेला। शिव के पावे खातिर पार्वती बरिसन घाम, बरखा आ धूर में तप कइली। ओह से उनकर देह करिया पड़ गइल। जब शिव खुश होके परगट भइले, त ऊ गंगा के पानी से पार्वती के नहवले। धूर धोआ गइल आ देह बिजुरी जइसन गोर चमक उठल। तब से ऊ महागौरी कहइली। माई उज्जर बस्तर पहिरेली, उज्जर बैल पर बइठेली। चार हाथ में तिरसूल, डमरू, अभय आ बरदान बा। उनकर उमिर आठ बरिस के मानल जाला, एही से आज कुँवारी कन्या के पूजा होला।

गोर रंग के एह कथा के सही अरथ बूझल जरूरी बा। एहिजा बात चमड़ी के रंग के नइखे। बात ओह उजास के बा जे कठिन मेहनत के बाद चेहरा पर आवेला। सातवाँ दिन करिया कालरात्रि आ आठवाँ दिन गोर महागौरी, दूनो एके माई हई। परंपरा खुद कहत बा कि रंग से केहू छोट बड़ ना होला।

भोजपुरी घर में अष्टमी के दू गो रीत सबसे प्यारा बा। पहिला खोइंछा। बेटी जब नइहर से बिदा होले त माई ओकरा अँचरा में चाउर, हरदी, दूब आ पइसा बान्ह देले। आज उहे खोइंछा दुर्गा माई के भरल जाला, काहे कि ऊ भी बेटी हई आ दू दिन बाद ससुरार लौट जइहें। दूसरा कन्या पूजन। टोला के नौ गो छोट लइकी के बोलावल जाला, उनकर गोड़ धोआवल जाला, आ हलुआ, पूड़ी, चना खिया के दछिना दिहल जाला। अष्टमी के रात निशा पूजा होला आ थान पर भीड़ उमड़ पड़ेला।

गोपालगंज के थावे भवानी के कथा एही रात सुनावल जाला। कहल जाला कि राजा मनन सिंह के अपना भगती के घमंड रहे। ओही राज में रहषू नाम के गरीब भगत रहले, जिनका पर माई के किरपा रहे। राजा उनका के ढोंगी कहले आ हुकुम दिहले कि माई के बोला के देखाव। रहषू बहुत समझवले कि माई अइहें त राज ना बची, बाकिर राजा ना मनले। तब माई कामाख्या से चल के थावे अइली। रहषू के माथ से उनकर कंगन वाला हाथ परगट भइल, आ राजा के महल आ घमंड दूनो ढह गइल। आज ओहिजा माई के मंदिर के लगे रहषू भगत के भी मंदिर बा। देहात के कथा में देवी हमेशा गरीब भगत के ओर ठाढ़ मिलेली।

अब एगो सीधा सवाल। कन्या पूजन साल में एक दिन होला, बाकिर कन्या साल भर घर में रहेले। नेपाल आ भारत दूनो देश के सरकारी स्वास्थ्य सर्वे बतावेला कि किशोरी आ मेहरारू में खून के कमी आजो बड़ समस्या बा, आ तराई-मधेस में ई आउर गहिर बा। गोड़ धोअल तबे पूरा पूजा ह जब ओही लइकी के थरिया में भर पेट खाना, हाथ में किताब आ फैसला में हिस्सा भी होखे। आज के भोग नरियर ह, जे बरत में नीमन ताकत देला।

रंग आज बैंगनी मानल जाता। रंग के चलन नया बा आ भोग के रीत घर घर में अलग हो सकेला।

रउआ घर में खोइंछा में का का धराला? आपन रीत [email protected] पर लिख भेजीं।