पाँचवा दिन माई के पहचान उनकर आपन नाम से ना, बेटा के नाम से होला। स्कंद के माई, स्कंदमाता। गोदी में लइका बा आ ओही गोदी में दुनिया के रच्छा भी।
कथा तारकासुर से शुरू होला। ऊ ब्रह्मा से बरदान माँग लिहले रहे कि ओकरा के खाली शिव के बेटा ही मार सके। ओह घरी शिव सती के बिछोह में तप में डूबल रहले, एह से असुर अपना के अमर बूझ लिहलस आ तीनो लोक में उत्पात मचवलस। तब पार्वती के तप, शिव से उनकर बियाह आ फेर स्कंद के जनम भइल, जिनका के कार्तिकेय आ कुमार भी कहल जाला। छव गो कृत्तिका उनका के पोसली, एह से उनकर छव मुँह मानल जाला। बड़ भइला पर स्कंद देवता लोग के सेनापति बनले आ तारकासुर के अंत कइले।
माई के चार हाथ बा। एक हाथ से ऊ गोदी में बइठल बाल स्कंद के सम्हरले बाड़ी, दू हाथ में कमल बा आ चउथा हाथ असीरबाद में उठल बा। सवारी सिंह के ह। ऊ कमल पर भी बइठल देखावल जाली, एह से उनकर एगो नाम पद्मासना ह। धेयान दीं: एह रूप में माई के हाथ में कवनो हथियार नइखे। लड़ाई बेटा लड़ी, बाकिर ओकरा के लड़े लायक माई बनवली।
भोजपुरी घर में ई रूप सबसे चिन्हार बा। लइका के जनम पर सोहर गावल जाला, छठियार में छठी माई पूजल जाली, आ ओकरा बाद साल दर साल महतारी के बरत चलत रहेला। अबहीं कुछ दिन पहिले जितिया बीतल ह, जब लाखन माई संतान खातिर पानी तक ना पियली। कुछ दिन बाद छठ आई। नवरात्र के पंचमी एह दूनो के बीच में पड़ेला, जइसे साल खुद महतारी लोग के नाम एगो पूरा मौसम लिख देले होखे। आ आज बहुत घर में कथा के रूप बदल गइल बा: माई गाँव में बाड़ी आ उनकर स्कंद खाड़ी, मलेसिया भा दिल्ली, पंजाब में कमात बा। गोदी खाली बा, बाकिर असीरबाद वाला हाथ ओसहीं उठल बा।
माई के गोदी के बारे में बिज्ञान भी अब उहे कहेला जे दादी नानी कहत रहली। कम वजन के भा समय से पहिले जनमल बच्चा के महतारी के छाती से सटा के राखे के तरीका के कंगारू मदर केयर कहल जाला। विश्व स्वास्थ्य संगठन एकर सिफारिश करेला, काहे कि एकरा से बच्चा के देह गरम रहेला, दूध पियावल आसान होला आ जान के खतरा घटेला। मतलब ई कि गोदी खाली दुलार ना ह, दवाई भी ह। आज के भोग केरा के बात करीं त ऊ बरत में तुरंत ताकत देवे वाला फल ह आ ओह में पोटैशियम भरपूर होला।
आज माई के केरा चढ़ावल जाला। रंग पियर मानल जाता। रंग के चलन नया बा आ भोग के रीत घर घर में अलग हो सकेला।
रउआ माई रउआ खातिर कवन बरत राखेली? उनकर कहानी उनके बोली में [email protected] पर भेजीं।
